Biography  |  Smt. Manju M. Lodha (Chairperson, Lodha Charitable Trust)


मुम्बई के आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक तथा शैक्षणिक जगत में ध्रुवतारा की तरह जगमगाती श्रीमती मंजू लोढ़ा का जन्म भीनमाल राजस्थान मूल निवासी प्रसिद्ध धार्मिक, समाजसेवी एवं उद्योगपति श्री किशोरमलजी लूकंड एवं श्रीमती सीता देवी लूकंड परिवार में 14 अक्टूबर 1960 को मुम्बई में जेष्ठपुत्री के रूप में हुआ। बी.ए. की शिक्षा ग्रहण करते समय, जोधपूर राजस्थान के प्रसिद्ध समाजसेवी एवं राजनीतिज्ञ जस्टिस श्री गुमानमलजी लोढ़ा एवं श्रीमती प्रेम कंवरजी लोढ़ा परिवार के जेष्ठपुत्र श्री मंगल प्रभात जी लोढ़ा के साथ 18 वर्ष की आयु में 1978 में इनकी शादी हो गई। दोनों पुत्र अभिषेक व अभिनंदन के कुछ बड़े होने पर ससुरजी के प्रोत्साहन एवं आज्ञा से आप लोढ़ा परिवार के समाजिक कार्यों को आगे बढ़ाने लगी।

आपको सामाजिक कार्यों की प्रेरणा आपकी माँ के द्वारा बचपन से ही संस्कार के साथ विरासत में मिली। आज आप मुम्बई कई प्रतिष्ठित संस्थाओं से संबद्ध है। इनमें ‘लोढ़ा चेरिटेबल ट्रस्ट’ के संस्थापक सदस्य तथा अध्यक्ष, ‘ज्ञान-गंगोत्री काव्य मंच’ के संस्थापक सदस्य, ‘जीनकुशल महिला मंडल’ के अध्यक्ष, ‘राजस्थानी महिला मंडल’ के कमिटी मेम्बर, ‘श्रीहरि सत्संग समिति’, ‘ओसवाल मित्र मंडल – फ्रेंड्स ऑफ ट्रायबल सोसायटी’ के सदस्य, ‘लायंस क्लब ऑफ वालकेश्वर’ के पिछले 35 वर्षों में पहली एक मात्र महिला अध्यक्ष, ‘चंद्रेश मेमोरियल स्कूल’ नालासोपारा, ठाणे तथा डोंबिवली, ‘इनरविल क्लब ऑफ बाम्बे सेंट्रल’ इत्यादि प्रमुख है।

बाल्यावस्था से ही आपको साहित्य से अनुराग हो गया था जिसके फलस्वरूप आपने किशोरावस्था से ही लेखनी को समाज सेवा का अस्त्र बना डाला और फिर कविता, लेख आदि विधाओं में समाज की ज्वलंत समस्याओं के निराकरण की दिशा देती रही। लेखनी की परिपक्वता ने आपको ‘ज्ञान-गंगोत्री’ का संस्थापक बना दिया, जिसके द्वारा नवोदित महिला कलाकारों को एक स्थाई मंच प्रदान किया। आपके कविता संग्रह ‘मन की लहरे’ जहां खूब सराहना पाई, वहीं बोध कथाओं की पुस्तक ‘प्रेरणा’ और धार्मिक नजरिए पर ‘जैन धर्म हमारा पावन पथ’ सिर माथे ली गई। ‘यादें’ आपकी उपलब्धियों का दर्पण प्रमाणित हुआ तो ‘माँ’ अन्तराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति पाई।

आप द्वारा स्थापित ‘लोढ़ा चेरिटेबल ट्रस्ट’ ने बच्चो, वृद्ध, नौजवान और महिला प्रत्येक वर्ग को समभाव से हर स्तर पर उनकी सेवा सहायता करने में तत्पर है। समस्या बच्चों के स्कूल की फीस की हो या उनकी ड्रेस अथवा पाठ्य सामग्री की, नवयुवको को रोजगार अथवा मार्गदर्शन की, महिलाओं को स्वावलंबी बनाने, वृद्धों को भरपूर सहयोग प्रदान करने की दिशा में सदैव मंजू लोढ़ा जी अग्रणी रही है। लोढ़ा चेरिटेबल ट्रस्ट वरिष्ठ नागरिकों को आवश्यकताओं पर उनके सहयोग हेतु विभिन्न कार्यक्रम संचालित कर रहा है। देव-दर्शन यात्रा, सीनियर सिटिजन कार्ड बनवाना, उनकी वसीयत बनवाना आदि इनमें प्रमुख है। विगत कई वर्षों से ट्रस्ट टिटवाला गणपति और महावीर धाम के प्रसिद्ध जैन मंदिरों की विशेष यात्रा का आयोजन करता है।

‘लोढ़ा चेरिटेबल ट्रस्ट’ के माध्यम से ‘चंद्रेश लोढ़ा मेमोरियल ग्रुप ऑफ स्कूल्स’ की स्थापना आपने अपने देवर की स्मृति में किया। मुम्बई उपनगर नालासोपारा में बना एक पूरा भवन इस स्कूल के लिये दान कर दिया। वर्तमान में इस स्कूल की शाखाएं डोंबिवली, ठाणे व नालासोपारा में है, जहाँ नर्सरी से लेकर दसवी तक इंगलिश मीडियम के विद्यालयों के संचालन के साथ ही जरूरतमंद छात्रों की शिक्षा हेतु छात्रवृति भी प्रदान की जाती है। प्रतिवर्ष लगभग पांच हजार छात्र यह लाभ प्राप्त कर रहे हैं। ट्रस्ट द्वारा संचालित ‘उड़ान’ कार्यक्रम के द्वारा प्रतिवर्ष बच्चों व युवाओं में छिपी प्रतिभाओं को निखारने हेतु बौद्धिक व खेल प्रतियोगितायें आयोजित की जाती है।

श्रीमती मंजू लोढ़ा जी का व्यवसाय कंस्ट्रक्शन का है। भवन निर्माण करने वाले श्रमिकों के बच्चों को आपकी ट्रस्ट द्वारा निःशुल्क शिक्षा, पाठ्य सामाग्री प्रदान की जाती है। इस दिशा में लगभग बीस हजार से अधिक बच्चें अब तक लाभान्वित हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह ट्रस्ट निर्धन परिवार के छात्र-छात्राओं हेतु विशेष कम्प्यूटर प्रशिक्षण निःशुल्क प्रदान कर रहा है। महिलाएं हेतु निःशुल्क मेंहदी, सिलाई, ब्यूटीशियन, क्राफ्ट, रंगोली जैसे प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किये जा रहें हैं। प्रति माह 315 गरीब तथा असहाय विधवा महिलाओं को अन्नदान योजना के माध्यम से महीने भर का राशन एवं अन्य जरूरी समान उपलब्ध करवाये जा रहें है। अत्याधुनिक सुविधायुक्त ‘हेल्थ केअर वैन’ के माध्यम से प्रतिदिन विभिन्न स्थानों पर चिकित्सा जाँच शिविर का आयोजन किया जाता है। एक्स-रे, पैथोलॉजी इत्यादि युक्त मोबाइल वैन के साथ नायर हॉस्पिटल, मुम्बई के कुशल एवं अनुभवी डॉक्टरों की टीम होती है। प्रतिदिन सौ से अधिक लोगों का हेल्थ चेकअप और इलाज किया जाता है।

श्रीमती मंजू लोढ़ा जी धार्मिक प्रवृति की यशस्वी महिला है। भक्त को ईश्वर तक पहुँचने की सरल विधा वे भक्ति को मानती है। भक्ति साकार रूप से ही सम्भव है। अपने सेवा कार्य को सुचारूता प्रदान करने हेतु अपने बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन व्यवसाय के तहत जहां कहीं भी भवन बनाती है, वहां के लोगों की राय लेकर देवी-देवताओं की मंदिरे अवश्य बनवाती है। डोंबिवली में जैन मंदिर, थाणा तथा अपोलों में गणेश मंदिर, साई मंदिर बनवाया है। जुहूचंद्रा वसई में निर्मित लोढ़ाधाम साधु-संतों के रहने, खाने, व्याख्यान देने का भव्य स्थान है। यहां पांच लाख से अधिक पुस्तकों का अद्भूत वाचनालय है, जो जैन धर्म से सम्बन्धित है और देश-विदेश के शोधार्थियों के लिए अनुपम स्थान है। यहां एक सुन्दर गौशाला भी है, जिसमें पच्चास से अधिक गायें है। नागौर, राजस्थान में कुल देवी मुंडवा का भव्य मंदिर आपने बनवाया है, यहाँ पर धर्मशाला और गौशाला निर्माणाधीन है। आप भविष्य में राजस्थान अथवा महाराष्ट्र के एक गांव को गोद लेकर उसकी चतुर्दिक विकास करना चाहती है।

समाज सेवा के अतिरिक्त आपको लेखन, स्पीच देना, संगीत, कला संग्रह, विदेश यात्रा इत्यादि में विशेष रूची है। आपके कार्यों में परिवार के सभी सदस्यों का भरपूर सहयोग तथा समर्थन प्राप्त है। आपके पति श्री मंगल प्रभातजी लोढ़ा मुम्बई के जानेमाने राजनीतिज्ञ व मालाबार विधानसभा क्षेत्र के विधायक है। ‘लोढ़ा ग्रुप ऑफ कम्पनीज’ के भवन निर्माण कार्य आपके दोनों पुत्र अभिषेक व अभिनंदन लोढ़ा संभालते है। आपकी दोनों बहुएं क्रमशः विनती तथा शीतल काफी शिक्षित एवं संस्कारी है। आपकी दोनों पोतियाँ यशवी तथा आयरा और एक पोता है, जो प्राण से अधिक प्रिय है।