मौन एकादशी – आत्म कल्याण का विशिष्ट तप

Manju Lodha

वर्ष भर में मार्गशीष मास की एकादशी का अद्भूत महत्व है। यह तिथि अत्यंत पुनित, पावन मानी गई है। इस दिन से मौन एकादशी व्रत की आराधना प्रारंभ की जाती है जो ग्यारह वर्ष तक की जाती है। आज के पवित्र दिन याने मार्गशीष महिने की एकादशी को अठरावे तीर्थकर परमात्मा अरनाथ भगवान ने राजपाट त्यागकर दीक्षा ग्रहण की थी। वहीं उन्नीसवें तीर्थकर मल्लीनाथ भगवान का जन्म, दीक्षा तथा केवलज्ञान यह तीनों कल्याणक इसी एकादशी के दिन हुए और 21वें तीर्थकर नमिनाथ प्रभू का केवलज्ञान कल्याणक भी इसी दिन सम्पन्न हुआ। इस प्रकार तीन तीर्थकर के पांच कल्याणक मार्गशीष शुक्ल एकादशी के कल्याणकारी दिन को पूर्ण हुए। तीर्थकर परमात्मा अनंत पुण्यों के पुंज होते है। उनके पुण्यों के उनके कल्याणकों से चारो गतियों में विचरित प्राणी मात्र को शांति, सुख और हर्ष की अनुभूति होती है। इस दिन तप-जप और मौन द्वारा तीनों तीर्थकर की अराधना की जाती है। मौन मन का आंतरीक तप है, वही वचन का तप है। मौनयुक्त उपवास करने से मन-वचन और तप तीनों योगों द्वारा आराधना होने से इंद्रिय संयम, वाणी संयम और एकाग्रता ध्यान संयम तीनों का संयम याने मौन एकादशी।    More »


सर्जिकल स्ट्राईक के बाद एक ही विकल्प युद्ध – महायुद्ध

Shri Kailash G. Saboo

पहले पठानकोट, फिर काश्मीर के उरी स्थित सेना के बेस केंप पर किये गये आतंकी हमले में 18 सैनिकों को मार गिराया। तब देश के हर कोने से अवाज उठी की आतंकवादीयों को मुँह तोड जवाब देने का समय अब आ गया है। तब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रक्षामंत्री मनोहर परिकर, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा विशेषज्ञ अजीत डोभाल तथा तीनों सेना के प्रमुख आदि ने वार रूम (रक्षा गुप्त प्रणाली) में बैठकर रणनीति बनाई जो स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार 29 सितंबर 2016 को हमारी सेना ने एल.ओ.सी. पार कर सर्जिकल स्ट्राईक की जिसमें पच्चासों पाकिस्तानी खुँखार आतंकवादियों को मौत के घाट उतार दिया और बिना क्षति के हमारी भारतीय सेना सीमा में लौट आई लेकिन पापी पाक विषैला नाग है, बदला लेने के लिए घात लगाकर आज भी भारतीय सैनिकों पर आक्रमण कर रहा है।
सर्जिकल स्ट्राईक के पाश्चात पूरा देश एक किस्म के गौरव ओर मनोबल से भर गया। औसत हर भारतीय को यह सोंचकर बड़ा सकून मिला कि अब वह मात्र चोट खानेवाला नहीं बल्कि चोट पहुँचाकर बड़ी क्षति करने में भी सक्षम है।    More »


दीपावली और व्यापार

Shri Shanker Kejriwal

दीपावली दीपों का त्यौहार है। महालक्ष्मी के पूजन का त्यौहार है। धन के देवता कुबेर और ऐश्वर्य की देवी लक्ष्मी की अभ्यर्थना का पावन अवसर है। व्यापार धनोपार्जन का साधन है। अत: व्यापार से जुड़े लोगों के लिए दीपावली पर्व का विशेष महत्व है।

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदीजी के आने के बाद व्यापार जगत में उम्मीदों का सैलाब आया। हर तरफ एक आशावादी माहौल बना और ये अपेक्षा की जाने लगी कि व्यापार उद्योग स्वर्णिम दौर में प्रवेश कर जाएगा। हालाँकि ये अपेक्षा व्यावहारिक नहीं थी और ऐसी प्रचंड अपेक्षाओं पर कोई भी सरकार खरी नहीं उतर सकती फिर भी प्रधानमंत्री ने कम समय में जो क्रांतिकारी कदम उठाए हैं उसका दूरगामी असर होगा। व्यापार जगत को थोड़ा सयंम रखने की आवश्यकता है। प्राय: हर मोर्चे पर सरकार ने सुधारात्मक और सकारात्मक कदम बढ़ाए हैं। टेक्सटाइल क्षेत्र पर सरकार का खास ध्यान है। विदेशी पूँजी निवेश से लेकर गुणवत्ता सुधारने, समय पर माल की आपूर्ति, बुनियादी ढांचे के विकास, बिजली-पानी, सड़क, बंदरगाह आदि की व्यवस्था के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं।    More »


इस सच को स्वीकार करें

Swaroopchand Goyal

भारत एक लोकतंत्रीय देश है। 18 वर्ष के पाश्चात् सभी नागरिकों को अपना मत देने का अधिकार प्राप्त है। मत देते समय प्रत्येक नागरिक को यह देखना होता है कि देश का, समाज का, मेरी भावना तथा मेरा भला-बुरा किसके साथ है, इसका ध्यान रखना है। मैं किस दल का चुनाव करू, जिससे मेरी आशा, आकांक्षा पूरी हो सके। यही कारण है चुनाव आने के कुछ महिनें पहले राजनीतिक पार्टी, वह क्षेत्रिय हो या राष्ट्रीय, विभिन्न प्रकार के वादे करते है। जनमानस को अपनी ओर लाने के लिए पता नहीं आजकल क्या-क्या वादे करते है। कुछ क्षेत्रिय भावनाएं भड़का कर, लालच देकर, बड़े-बड़े वादे कर लुभातें है। चुनाव से पहले अपने पिछले किये कामों का प्रचार करते हुए लाखों नही, करोड़ो रुपये बहा दिये जाते है। गरीबी का लाभ उठाकर दारू से लेकर नकद रुपये पानी की तरह बहाने का कार्य भी होता है। अर्थात् लालच देकर भोले-भोले नागरिकों को अपने पक्ष में किया जाता है। गरीबी हटाओ, महंगाई खत्म करने तथा भ्रष्टाचार मिटाने तक की कसम खाई जाती है। साड़ी बांटना, लैपटॉप बांटना मानो फैशन बन गया है।    More »


सजा ही सिखाएगी सबक

Shri Sunder Chand Thakur

जिस देश में हर आधे घंटे में एक रेप होता हो, वहां रेप विक्टिम्स के प्रति लोगों का बहुत संजीदा न होना हैरान करने वाला नहीं। आए दिन तो रेप की खबरें पढ़ने-सुनने को मिलती रहती हैं। इतनी संख्या में रेप होते हैं कि कुछ मामलों को मीडिया भी नजरअंदाज कर देता है।
दिल्ली रेप केस में पीडि़ता को ‘निर्भया’ घोषित करने के बाद मीडिया ने अपनी सहूलियत से दूसरी न जाने कितनी ही निर्भयाओं की ओर नजर उठा कर भी नहीं देखा। जाहिर है कि ऐसी खबरों के चयन में पीड़िताओं और रेपिस्ट की ‘क्लास’, उसका वर्ग अहम होता है। मगर थोड़ी देर के लिए आप जरा वर्ग से बाहर निकल कर व्यक्ति पर आएं और खुद को बलात्कार-पीड़िता के भाई, पिता, बहन और मां के रूप में देखें, तो शायद आपको अहसास हो कि आप एक संप्रभु, सभ्य और आजाद मुल्क में नहीं, बल्कि वहशियों और दरिंदों की दुनिया में जी रहे हैं, जहां शासन तंत्र के नाम पर सिर्फ आपको भरमाने के लिए आपकी सुरक्षा के वास्ते तरह-तरह के विभाग खोल दिए गए हैं।    More »


पूर्व जन्म, शरीर, मृत्यु और पुर्नजन्म

Kranti Kumar

पूर्वजन्म – हमारे इस जन्म के दुखों का कारण पूर्वजन्म में किये गये पाप कर्म हैं। अतः हमें इस जीवन में सदैव पुण्य कर्म करने चाहिए, जिससे अगले जन्म कष्टमय न हो।
• पूर्वजन्म के संस्कार दो प्रकार के होते है –
    o स्थायी – इनका परिणाम भोगना ही पड़ता है
    o अस्थाई – इनको दान-पुण्य, यज्ञ, तप, भगवान नाम आदि उपायों द्वारा मिटाया जा सकता है।
• मृत्यु का भय पूर्वजन्म के संस्कार के रूप में इस जन्म में विधमान रहता है। इसी कारण जन्म लेने के उपारांत सभी जीव मृत्यु से डरने लगते है।
• पूर्वजन्म के संस्कार स्मरण रहने के कारण जन्म से ही किसी-किसी को पिछले जन्म की घटनाये याद रहती है।
• संयम (धारणा, ध्यान एवं समाधि) की परिपक्वता की अवस्था में पूर्व जन्म का ज्ञान होता है।
• संस्कारों के साक्षातकार से दूसरों के पूर्व जन्मों का ज्ञान होना संभव है।    More »



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